आतंकवाद अब खत्म करो
बम ना चले, बंदूक ना हो,
धरती पर अब युद्ध ना हो।
भारत हो या पाकिस्तान,
सबसे पहले हो इंसान।
आतंक से किसका भला हुआ?
केवल दुख और ग़म मिला हुआ।
रोते हैं बच्चे, डरते हैं लोग,
टूटते हैं सपने, जलते हैं लोग।
हमें नहीं चाहिए यह डर का जहाँ,
चाहिए बस प्रेम भरा आसमाँ।
जहाँ ना हों बम, ना हों बंदूकें,
हो बस हँसी, हो मीठी बातें।
आतंकवाद को अब मिटाना है,
प्यार का दीप जलाना है।
हाथ में हाथ, दिल में दिल हो,
शांति का सुंदर सिलसिला हो।
ना हो कोई धर्म का झगड़ा,
ना हो नफ़रत, ना हो डगमग।
एक दुनिया, एक परिवार,
सबका सपना, सबका प्यार।
चलो सब मिलकर ये प्रण करें,
आतंकवाद को हम दूर करें।
भारत-पाकिस्तान संग मुस्काएँ,
नई सुबह को हम अपनाएँ।
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